मत्ती 6:25 - कुल्वी25 “हांऊँ तुसाबै बोला सा, आपणै प्राणै री तैंईंयैं फिक्र मता केरदै कि आसा कि खाँणा होर कि पीणा? न आपणी देही री तैंईंयैं कि आसा कि लाणा? कि ज़ान रोटी न होर देह झिकड़ै न ज़ादा कीमती नी ऑथि? Viz kapitolaबाघली सराज़ी नऊंअ बधान25 “तैही बोला हुंह तम्हां लै इहअ कि आपणीं ज़िन्दगी लै इहअ फिकर निं करी कि किज़ै खाणअ किज़ै पिणअ? नां आपणीं देही लै फिकर करी कि हाम्हां किज़ै बान्हणअ? ज़िन्दगी आसा रोटी का और देही आसा झिकल़ै का खास्सी किम्मती। Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम25 हाऊं तमाबे बोला, चिन्ता नांई करे-कि हामा कैह खाणा होर कैह झूटणा; होर ना आपणे शरीरा बै कि कैह बानणा। कैह प्राण रोटी का, होर शरीर झिकड़े का बढ़ीकरे नांई आसा? Viz kapitola |