मत्ती 25:46 - कुल्वी46 “होर इन्हां नरकै री हमेशा री सज़ा भुगतणी पर धर्मी मांहणु बै स्वर्गा न हमेशा री ज़िन्दगी मिलणी ज़ो कैधी भी नी खत्म होंणी।” Viz kapitolaबाघली सराज़ी नऊंअ बधान46 “एते तैणीं आसा अह सदा रहणैं आल़ी सज़ा तम्हां बाऊंईं पाशल़ी आल़ै लै। दैहणीं पाशल़ी आल़ै धर्मीं मणछा भेटणीं सदा रहणैं आल़ी लै ज़िन्दगी।” Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम46 होर याह अनन्त दण्ड भोगणा पर धर्मी अनन्त जीबना में भेटणा। Viz kapitola |