शधाणूं 26:5 - कुल्वी5 ते मुँभै बचपना न ज़ाणा ती, अगर ते चाहा सी ता ऐसा गैला री गुआही देई सका ती कि हांऊँ एक फरीसी मौंझ़ै न होईया आपणै धर्मा रै सैभी न खरै पन्थै रै मुताबक च़लू। Viz kapitolaबाघली सराज़ी नऊंअ बधान5 तिंयां बछ़ैणा मुंह होछ़ी उझै और एसा गल्ला सका तिंयां खोज़ी कि मंऐं ज़िऊई फरीसी पंथे साबै आपणीं सारी ज़िन्दगी। Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम5 जेबा त्याह गुआही दींणा चाहंदा, तो पहिले का माह पछेणदा कि हाँऊ फरीसी होई करे आपणे धर्मा में सभी का खरे पंथा में जिंदगी बिताई दी आसा। Viz kapitola |