शधाणूं 2:6 - कुल्वी6 ज़ैबै बागरी सांही एक छ़ेड़ शुणुई ता लोकै री भीड़ कठी हुई होर सैभै लोका डौरै किबैकि हरेकी न ऐ शुणिया ती कि ऐ ता मेरी भाषा बोलदा लागा सा। Viz kapitolaबाघली सराज़ी नऊंअ बधान6 ज़ांऊं सह बडी छ़ेल़ हुई ता ओरी-पोरी का आऐ बडै भारी लोग और तिधी हूऐ बडै भारी खास्सै लोग कठा और लोग डरै। किल्हैकि तिन्नां शुणिआं त हरेकी का इहअ कि ईंयां आसा लागै दै म्हारी ई बोली दी गल्ला करदै। Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम6 जेबा यह शब्द शूणू तेबा तखे भीड़ कठे होई होर लोका डरी किबेकी हर एकी बे यही शब्द शुणदअ लागा कि या मेरी भाषा में बोलदे लागेदे। Viz kapitola |