2 कुरिन्थी 5:1 - कुल्वी1 किबैकि आसै ज़ाणा सी, कि ज़ैबै आसै शरीर रूपी डेरै न रौहा सी, ज़ो थोड़ै बौगता री तैंईंयैं आसाबै दुनिया न मिलु सा; होर ज़ैबै ऐई दुनिया रा अंत होंणा, तैबै आसाबै परमेश्वरै री तरफा न स्वर्गा न ऐण्ढा शरीर मिलणा, ज़ो हमेशा री तैंईंयैं होंणा। Viz kapitolaबाघली सराज़ी नऊंअ बधान1 किल्हैकि हाम्हां का आसा थोघ कि ज़ेभै पृथूई प्रैंदै म्हारी देहीओ डेरै ज़िहअ घर ढोल़णअ, ता परमेशरा बाखा का भेटणअ हाम्हां स्वर्गै एक इहअ घर, ज़ुंण मणछे हाथा करै नांईं आथी बणांअ द, पर सह आसा अमर ज़ुंण हाम्हां लै परमेशरै आप्पै बणांअ। (इब्रानी 9:11; आयूब 4:19) Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम1 किबेकि हामे जाणा कि जेबा महारा धरती पेन्धला डेरा सरीखा घर ढोल़णअं, तेबा हामा परमेश्वर री तरफा का स्वर्गा में एक एढअ घर बेटणअं जोह हाथे संघे बणु दअ घर नांई, पर आपणे आप अनन्त बे बणू दअ आसा। Viz kapitola |