ज़करियाह 8:6 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20196 और रब्ब — उल — अफ़वाज यूँ फ़रमाता है कि अगरचे उन दिनों में यह 'अम्र इन लोगों के बक़िये की नज़र में हैरत अफ़ज़ा हो, तोभी क्या मेरी नज़र में हैरत अफ़ज़ा होगा? रब्ब — उल — अफ़वाज फ़रमाता है। Viz kapitolaकिताब-ए मुक़द्दस6 रब्बुल-अफ़वाज फ़रमाता है, ‘शायद यह उस वक़्त बचे हुए इसराईलियों को नामुमकिन लगे। लेकिन क्या ऐसा काम मेरे लिए जो रब्बुल-अफ़वाज हूँ नामुमकिन है? हरगिज़ नहीं!’ Viz kapitola |