गज़लुल 1:6 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20196 मुझे मत देखो कि मैं सियाहफ़ाम हूँ, क्यूँकि मैं धूप की जली हूँ। मेरी माँ के बेटे मुझ से नाख़ुश थे, उन्होंने मुझ से खजूर के बाग़ों की निगाहबानी कराई; लेकिन मैंने अपने खजूर के बाग़ की निगहबानी नहीं की Viz kapitolaकिताब-ए मुक़द्दस6 इसलिए मुझे हक़ीर न जानो कि मैं स्याहफ़ाम हूँ, कि मेरी जिल्द धूप से झुलस गई है। मेरे सगे भाई मुझसे नाराज़ थे, इसलिए उन्होंने मुझे अंगूर के बाग़ों की देख-भाल करने की ज़िम्मादारी दी, अंगूर के अपने ज़ाती बाग़ की देख-भाल मैं कर न सकी। Viz kapitola |