मुकाशफ़ा 3:2 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20192 “जागता रहता, और उन चीज़ों को जो बाक़ी है और जो मिटने को थीं मज़बूत कर, क्यूँकि मैंने तेरे किसी काम को अपने ख़ुदा के नज़दीक पूरा नहीं पाया। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा2 इसलिये बेदार हो जाओ! और जो कुछ बाक़ी बचा हुआ है और ख़त्म होने ही वाला है उसे मज़बूती से क़ाइम कर क्यूंके मैंने तुम्हारे कामों को अपने ख़ुदा की नज़र में कामिल नहीं पाया है। Viz kapitolaकिताब-ए मुक़द्दस2 जाग उठ! जो बाक़ी रह गया है और मरनेवाला है उसे मज़बूत कर। क्योंकि मैंने तेरे काम अपने ख़ुदा की नज़र में मुकम्मल नहीं पाए। Viz kapitola |