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मुकाशफ़ा 22:2 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

2 और दरिया के पार ज़िन्दगी का दरख़्त था। उसमें बारह क़िस्म के फल आते थे और हर महीने में फलता था, और उस दरख़्त के पत्तों से क़ौमों को शिफ़ा होती थी।

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उर्दू हमअस्र तरजुमा

2 यह दरिया उस शहर की शाहराह के वसत मैं बहता था। और उस दरिया के दोनों तरफ़ शजरे हयात थे। उस में बारह क़िस्म के फल आते थे और हर महीने में फल देता था और उस दरख़्त के पत्तों से दुनिया की सब क़ौमों को शिफ़ा होती थी।

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किताब-ए मुक़द्दस

2 शहर की बड़ी सड़क के बीच में से बह रहा था। दरिया के दोनों किनारों पर ज़िंदगी का दरख़्त था। यह दरख़्त साल में बारह दफ़ा फल लाता था, हर महीने में एक बार। और दरख़्त के पत्ते क़ौमों की शफ़ा के लिए इस्तेमाल होते थे।

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मुकाशफ़ा 22:2

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