मुकाशफ़ा 18:21 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201921 फिर एक ताक़तवर फ़रिश्ते ने बड़ी चक्की के पाट की तरह एक पत्थर उठाया, और ये कहकर समुन्दर में फेंक दिया, “बाबुल का बड़ा शहर भी इसी तरह ज़ोर से गिराया जाएगा, और फिर कभी उसका पता न मिलेगा। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा21 फिर एक और फ़रिश्ता ने बड़ी चक्की के पाट की मानिन्द एक पत्थर उठाया और ये कह कर उसे समुन्दर में फेंक दिया, “बाबुल का अज़ीम शहर भी इसी तरह ज़ोर से गिराया जायेगा, और फिर उस का कभी पता न चलेगा।” Viz kapitolaकिताब-ए मुक़द्दस21 फिर एक ताक़तवर फ़रिश्ते ने बड़ी चक्की के पाट की मानिंद एक बड़े पत्थर को उठाकर समुंदर में फेंक दिया। उसने कहा, “अज़ीम शहर बाबल को इतनी ही ज़बरदस्ती से पटक दिया जाएगा। बाद में उसे कहीं नहीं पाया जाएगा। Viz kapitola |