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मुकाशफ़ा 10:4 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

4 जब गरज की सात आवाज़ें सुनाई दे चुकीं तो मैंने लिखने का इरादा किया, और आसमान पर से ये आवाज़ आती सुनी, जो बातें गरज की इन सात आवाज़ों से सुनी हैं, उनको छुपाए रख और लिख मत।

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उर्दू हमअस्र तरजुमा

4 उन आवाज़ों को सुन कर मैंने लिखने का इरादा किया ही था के आसमान से एक आवाज़ आती सुनी, “जो कुछ उन गरज की सी सात आवाज़ों से सुनी हैं, उसे पोशीदा रख और तहरीर में न ला।”

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किताब-ए मुक़द्दस

4 उनके बोलने पर मैं उनकी बातें लिखने को था कि एक आवाज़ ने कहा, “कड़क की सात आवाज़ों की बातों पर मुहर लगा और उन्हें मत लिखना।”

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मुकाशफ़ा 10:4

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