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ज़बूर 13:2 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

2 कब तक मैं जी ही जी में मन्सूबा बाँधता रहूँ, और सारे दिन अपने दिल में ग़म किया करू? कब तक मेरा दुश्मन मुझ पर सर बुलन्द रहेगा?

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किताब-ए मुक़द्दस

2 मेरी जान कब तक परेशानियों में मुब्तला रहे, मेरा दिल कब तक रोज़ बरोज़ दुख उठाता रहे? मेरा दुश्मन कब तक मुझ पर ग़ालिब रहेगा?

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ज़बूर 13:2

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