ज़बूर 1:5 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20195 इसलिए शरीर 'अदालत में क़ाईम न रहेंगे, न ख़ताकार सादिक़ों की जमा'अत में। Viz kapitolaकिताब-ए मुक़द्दस5 इसलिए बेदीन अदालत में क़ायम नहीं रहेंगे, और गुनाहगार का रास्तबाज़ों की मजलिस में मक़ाम नहीं होगा। Viz kapitola |