ज़बूर 1:1 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20191 मुबारक है वह आदमी जो शरीरों की सलाह पर नहीं चलता, और ख़ताकारों की राह में खड़ा नहीं होता; और ठट्ठा बाज़ों की महफ़िल में नहीं बैठता। Viz kapitolaकिताब-ए मुक़द्दस1 मुबारक है वह जो न बेदीनों के मशवरे पर चलता, न गुनाहगारों की राह पर क़दम रखता, और न तानाज़नों के साथ बैठता है Viz kapitola |