गिनती 35:31 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201931 और तुम उस क़ातिल से जो वाजिब — उल — क़त्ल हो दियत न लेना बल्कि वह ज़रूर ही मारा जाए। Viz kapitolaकिताब-ए मुक़द्दस31 क़ातिल को ज़रूर सज़ाए-मौत देना। ख़ाह वह इससे बचने के लिए कोई भी मुआवज़ा दे उसे आज़ाद न छोड़ना बल्कि सज़ाए-मौत देना। Viz kapitola |