अहबार 25:23 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201923 “और ज़मीन हमेशा के लिए बेची न जाए क्यूँकि ज़मीन मेरी है, और तुम मेरे मुसाफ़िर और मेहमान हो। Viz kapitolaकिताब-ए मुक़द्दस23 कोई ज़मीन भी हमेशा के लिए न बेची जाए, क्योंकि मुल्क की तमाम ज़मीन मेरी ही है। तुम मेरे हुज़ूर सिर्फ़ परदेसी और ग़ैरशहरी हो। Viz kapitola |