अहबार 2:4 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20194 “और जब तू तनूर का पका हुआ नज़्र की क़ुर्बानी का हदिया लाए, तो वह तेल मिले हुए मैदे के बेख़मीरी गिरदे या तेल चुपड़ी हुई बेख़मीरी चपातियाँ हों। Viz kapitolaकिताब-ए मुक़द्दस4 अगर यह क़ुरबानी तनूर में पकाई हुई रोटी हो तो उसमें ख़मीर न हो। इसकी दो क़िस्में हो सकती हैं, रोटियाँ जो बेहतरीन मैदे और तेल से बनी हुई हों और रोटियाँ जिन पर तेल लगाया गया हो। Viz kapitola |