अहबार 19:20 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201920 “अगर कोई ऐसी 'औरत से सुहबत करे जो लौंडी और किसी शख़्स की मंगेतर हो, और न तो उसका फ़िदिया ही दिया गया हो और न वह आज़ाद की गई हो, तो उन दोनों की सज़ा मिले लेकिन वह जान से मारे न जाएँ इसलिए कि वह 'औरत आज़ाद न थी। Viz kapitolaकिताब-ए मुक़द्दस20 अगर कोई आदमी किसी लौंडी से जिसकी मँगनी किसी और से हो चुकी हो हमबिसतर हो जाए और लौंडी को अब तक न पैसों से न वैसे ही आज़ाद किया गया हो तो मुनासिब सज़ा दी जाए। लेकिन उन्हें सज़ाए-मौत न दी जाए, क्योंकि उसे अब तक आज़ाद नहीं किया गया। Viz kapitola |