याक़ूब 3:8 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20198 मगर ज़बान को कोई क़ाबू में नहीं कर सकता वो एक बला है जो कभी रुकती ही नहीं ज़हर — ए — क़ातिल से भरी हुई है। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा8 लेकिन कोई इन्सान ज़बान को क़ाबू में नहीं कर सकता। ये मुहलिक ज़हर उगलने वाली वो बला है जिसे रोका नहीं जा सकता। Viz kapitolaकिताब-ए मुक़द्दस8 लेकिन ज़बान पर कोई क़ाबू नहीं पा सकता, इस बेताब और शरीर चीज़ पर जो मोहलक ज़हर से लबालब भरी है। Viz kapitola |