इबरानियों 10:2 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20192 अगर वह कामिल कर सकती तो क़ुर्बानियाँ पेश करने की ज़रूरत न रहती। क्यूँकि इस सूरत में इबादत करने से एक बार सदा के लिए पाक — साफ़ हो जाते और उन्हें गुनाहगार होने का शऊर न रहता। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा2 अगर वो कामिल कर सकतीं तो क़ुर्बानियां पेश करने की ज़रूरत नहीं होती? क्यूंके इस सूरत में इबादत करने वाले एक ही बार में हमेशा के लिये पाक साफ़ हो जाते तो उन का ज़मीर फिर उन्हें गुनहगार न ठहराता। Viz kapitolaकिताब-ए मुक़द्दस2 अगर वह कामिल कर सकती तो क़ुरबानियाँ पेश करने की ज़रूरत न रहती। क्योंकि इस सूरत में परस्तार एक बार सदा के लिए पाक-साफ़ हो जाते और उन्हें गुनाहगार होने का शऊर न रहता। Viz kapitola |