गलतियों 3:11 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201911 और ये बात साफ़ है कि शरी'अत के वसीले से कोई इंसान ख़ुदा के नज़दीक रास्तबाज़ नहीं ठहरता, क्यूँकि कलाम में लिखा है, रास्तबाज़ ईमान से जीता रहेगा। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा11 अब यह साफ़ ज़ाहिर है के शरीअत के वसीले से कोई शख़्स ख़ुदा की हुज़ूरी में रास्तबाज़ नहीं ठहराया जाता, क्यूंके लिख्खा है: “रास्तबाज़ ईमान से ज़िन्दा रहेगा।” Viz kapitolaकिताब-ए मुक़द्दस11 यह बात तो साफ़ है कि अल्लाह किसी को भी शरीअत की पैरवी करने की बिना पर रास्तबाज़ नहीं ठहराता, क्योंकि कलामे-मुक़द्दस के मुताबिक़ रास्तबाज़ ईमान ही से जीता रहेगा। Viz kapitola |