दानियाल 4:1 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20191 नबूकदनज़र बादशाह की तरफ़ से तमाम लोगों, उम्मतों और अहल — ए — ज़ुबान के लिए जो तमाम इस ज़मीन पर रहते हैं: तुम्हारी सलामती होती रहे। Viz kapitolaकिताब-ए मुक़द्दस1 नबूकदनज़्ज़र दुनिया की तमाम क़ौमों, उम्मतों और ज़बानों के अफ़राद को ज़ैल का पैग़ाम भेजता है, सबकी सलामती हो! Viz kapitola |