रसूलों 3:2 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20192 और लोग एक पैदाइशी लंगड़े को ला रहे थे, जिसको हर रोज़ हैकल के उस दरवाज़े पर बिठा देते थे, जो ख़ूबसूरत कलहाता है ताकि हैकल में जाने वालों से भीख माँगे। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा2 और लोग एक आदमी को जो पैदाइशी लंगड़ा था बैतुलमुक़द्दस के ख़ूबसूरत नामी एक दरवाज़े पर छोड़ जाते थे, जहां वह बैतुलमुक़द्दस के सेहनों में हर रोज़ अन्दर जाने वालों से भीक मांगा करता था। Viz kapitolaकिताब-ए मुक़द्दस2 उस वक़्त लोग एक पैदाइशी लँगड़े को उठाकर वहाँ ला रहे थे। रोज़ाना उसे सहन के उस दरवाज़े के पास लाया जाता था जो ‘ख़ूबसूरत दरवाज़ा’ कहलाता था ताकि वह बैतुल-मुक़द्दस के सहनों में दाख़िल होनेवालों से भीक माँग सके। Viz kapitola |