रसूलों 17:29 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201929 पस, ख़ुदा की नस्ल होकर हम को ये ख़याल करना मुनासिब नहीं कि ज़ात — ए — इलाही उस सोने या रुपऐ या पत्थर की तरह है जो आदमियों के हुनर और ईजाद से गढ़े गए हों। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा29 “अगर हम हैं तो हमें ये नहीं सोचना चाहिये के नस्ले इलाही सोने, चांदी या पत्थर की मूरत है जो किसी इन्सान की माहिराना कारीगरी का नमूना हो। Viz kapitolaकिताब-ए मुक़द्दस29 अब चूँकि हम अल्लाह के फ़रज़ंद हैं इसलिए हमारा उसके बारे में तसव्वुर यह नहीं होना चाहिए कि वह सोने, चाँदी या पत्थर का कोई मुजस्समा हो जो इनसान की महारत और डिज़ायन से बनाया गया हो। Viz kapitola |