2 कुरि 5:4 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20194 क्यूँकि हम इस ख़ेमे में रह कर बोझ के मारे कराहते हैं इसलिए नहीं कि ये लिबास उतारना चाहते हैं बल्कि इस पर और पहनना चाहते हैं ताकि वो जो फ़ानी है ज़िन्दगी में ग़र्क़ हो जाए। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा4 हम इस ख़ेमा में रहते हुए बोझ के मारे कराहते हैं क्यूंके हम यह लिबास उतारना नहीं चाहते, बल्के उसी पर दूसरा पहन लेना चाहते हैं, ताके जो फ़ानी है वह बक़ा का लुक़मा बन जाये। Viz kapitolaकिताब-ए मुक़द्दस4 इस झोंपड़ी में रहते हुए हम बोझ तले कराहते हैं। क्योंकि हम अपना फ़ानी लिबास उतारना नहीं चाहते बल्कि उस पर आसमानी घर का लिबास पहन लेना चाहते हैं ताकि ज़िंदगी वह कुछ निगल जाए जो फ़ानी है। Viz kapitola |