2 कुरि 4:16 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201916 इसलिए हम हिम्मत नहीं हारते बल्कि चाहे हमारी ज़ाहिरी इंसान ियत जाहिल हो जाती है फिर भी हमारी बातिनी इंसान ियत रोज़ ब, रोज़ नई होती जाती है। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा16 इसलिये हम हिम्मत नहीं हारते। ख़्वाह हमारी ज़ाहिरी तौर से जिस्मानी क़ुव्वत कम होती जा रही है, लेकिन बातिनी रूहानी क़ुव्वत रोज़-ब-रोज़ बढ़ती जा रही है। Viz kapitolaकिताब-ए मुक़द्दस16 इसी वजह से हम बेदिल नहीं हो जाते। बेशक ज़ाहिरी तौर पर हम ख़त्म हो रहे हैं, लेकिन अंदर ही अंदर रोज़ बरोज़ हमारी तजदीद होती जा रही है। Viz kapitola |