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1 कुरि 8:7 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

7 लेकिन सब को ये इल्म नहीं बल्कि कुछ को अब तक बुतपरस्ती की आदत है इसलिए उस गोश्त को बुत की क़ुर्बानी जान कर खाते हैं और उसका दिल, चुँकि कमज़ोर है, गन्दा हो जाता है।

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उर्दू हमअस्र तरजुमा

7 लेकिन यह इल्म सब को नहीं है। बाज़ लोग अब तक बुतों को की परसतिश के आदी हैं इसलिये जब वह क़ुर्बानी के गोश्त इस ख़्याल से खाते हैं के यह किसी ख़ुदा की नज़्र की क़ुर्बानी है, तो अपने ज़मीर की कमज़ोरी की वजह से, वह अपने आप को नापाक समझने लगते हैं।

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किताब-ए मुक़द्दस

7 लेकिन हर किसी को इसका इल्म नहीं। बाज़ ईमानदार तो अब तक यह सोचने के आदी हैं कि बुत का वुजूद है। इसलिए जब वह किसी बुत की क़ुरबानी का गोश्त खाते हैं तो वह समझते हैं कि हम ऐसा करने से उस बुत की पूजा कर रहे हैं। यों उनका ज़मीर कमज़ोर होने की वजह से आलूदा हो जाता है।

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1 कुरि 8:7

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