1 कुरि 13:2 - इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20192 और अगर मुझे नबुव्वत मिले और सब भेदों और कुल इल्म की वाक़फ़ियत हो और मेरा ईमान यहाँ तक कामिल हो कि पहाड़ों को हटा दूँ और मुहब्बत न रख़ूँ तो मैं कुछ भी नहीं। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा2 अगर मुझे नुबुव्वत करने की नेमत मिल जाये और मैं हर राज़ और हर इल्म से वाक़िफ़ हो जाऊं और मेरा ईमान इतना कामिल हो के पहाड़ों को सरका दूं, लेकिन महब्बत से ख़ाली रहूं, तो में कुछ भी नहीं। Viz kapitolaकिताब-ए मुक़द्दस2 अगर मेरी नबुव्वत की नेमत हो और मुझे तमाम भेदों और हर इल्म से वाक़िफ़ियत हो, साथ ही मेरा ऐसा ईमान हो कि पहाड़ों को खिसका सकूँ, लेकिन मेरा दिल मुहब्बत से ख़ाली हो तो मैं कुछ भी नहीं। Viz kapitola |