51 दका, मय तुमके भेद चो गोठ बलें सें आमी सपाय नी मरवां, मान्तर सपाय बदलुन जांवा,
51 देख, मी तुम से गुप्त की बात कहूँ हैं: हम सब नी मरे, पर सब बदल जाहे,