दिब्य दरस 2:27 - गढवली नयो नियम27 मि ऊं तैं राज्य कनु को उन ही अधिकार दयुलु जन मेरा बुबा ल मि तैं दियूं च। ऊंको राज्य लूहा का जन मजबूत होलो जु टुटद नि च, अर उ, ऊं पर दया करयां बगैर राज्य करलो, अर ऊं तैं उन ही के चकनाचूर कैरी दयालो जन लोग माटा ल बणयां भांडों तैं तोड़ी दींदिनि। Viz kapitolaGarhwali27 अर वु लोखरो जांठु लेके बड़ी सख्तै से सासन करलु, अर जु लोग परमेस्वर का खिलाप मा छिन वु ऊंतैं चूर-चूर कैरी द्यालु जन कि माटा का भाँडो तैं चूर-चूर किये जान्दु। Viz kapitola |