मत्ती 25:29 - गढवली नयो नियम29 किलैकि जै मा थोड़ी भि मेरी बातों तैं समझणु की समझ छैं च वे तैं और दिये जालि पर जै मा थोड़ा भि नि च वेमा बट्टी उ भि लिये जालि जु वेमा छैं च। Viz kapitolaGarhwali29-30 अर ये निकमा नौकर तैं भैर अन्धेरा मा ढोळि द्या, जख रुंण अर दांतों तैं कड़गिटाण ही होलु, किलैकि जु कुई भि परमेस्वर का राज तैं बिंगणे की इच्छा रखदु, वेतैं वेका बारा मा बिंगण को और भि जादा ज्ञान दिये जालु। मगर जु मनखि इन सोचदु, कि मितैं भौत ज्ञान च, त वे बटि वु ज्ञान भि छिनै जालु।’” Viz kapitola |