मत्ती 25:24 - गढवली नयो नियम24 तब जै तैं एक चांदी का सिक्का मिली छो वेल ऐ के बोलि, हे स्वामी मि त्वे तैं जंणदु छो कि तु कठोर मनिख छै: तु एक इन मनिख जन छै जु दुसरा लुखुं का काम बट्टी फायदा कमाणै की उम्मीद करदी छै। Viz kapitolaGarhwali24 “तब जैतैं एक हजार सिक्का मिल्यां छा, वेन भि मालिक का पास ऐके बोलि, ‘साब, मि जणदु छौ कि तुम सक्त मनखि छाँ, किलैकि तुम उख बटि लवै करद्यां जख तुमुन बूति नि च, अर जख तुमुन बीज नि छिलारी उख बटि तुम बटोल्दा छाँ। Viz kapitola |