इब्रानी 11:35 - गढवली नयो नियम35 कुछ जननों ल अपड़ा मुरयां लुखुं तैं फिर से ज्यून्दो पै; कथग ही त मार खांदी-खांदी मोरि गैनी; अर उ अपड़ो विश्वास नि छुड़ण चांदा छा कि उ कैद बट्टी आजाद हवे जां; इलै मोरि के भि फिर से ज्यून्दा हूंणा का बाद उ एक भौत अच्छो जीवन पै साका। Viz kapitolaGarhwali35 अर जु जनानियां पिता परमेस्वर पर बिस्वास करदी छै ऊंन अपणा मुरयां लोगु तैं फिर से ज्यून्द पै। मगर बिस्वास करण वळा भौत सा लोगु तैं सतयै गै अर कुछ तैं मरे गै, पर ऊंन बिस्वास करण नि छोड़ि ताकि परमेस्वर ऊंतैं मुरदो मा बटि ज्यून्द कैरो अर सदनि को जीवन द्यो। Viz kapitola |