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दिब्य दरस 22:5 - Garhwali

5 फिर उख कभि भि रात नि होलि अर ना ही ऊंतैं सूरज या द्‍यू का उज्याळा की जरुरत होलि, किलैकि प्रभु परमेस्वर खुद ऊंको उज्याळु होलु, अर ऊ हमेसा-हमेसा तक राज करला।

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गढवली नयो नियम

5 अर फिर कभी रात नि होली, अर जु लोग उख रौन्दींनि, ऊं तैं अपड़ा रस्ता मा उज्यलो कनु कु दिवड़ै की कुई जरूरत नि च। न ही ऊं तैं उज्यलो दींण कु सूरज की जरूरत च। किलैकि पिता परमेश्वर ही च जु लुखुं तैं उज्यलो दींद। अर यु लोग जु उख रौदींनि उ हमेशा कु राज्य करदींनि।

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दिब्य दरस 22:5

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