दिब्य दरस 20:4 - Garhwali4 तब मिन राजगद्दी देखि अर ऊं लोग की आत्माओं तैं भि देखि जु कि राजगद्दी पर बैठयां छा, जौं का मुण्ड़ यीशु की गवै देण अर परमेस्वर का वचन तैं बतौण की वजै से कटै गै छौ। अर यू वु आत्मा छिन जौं तैं परमेस्वर न न्याय करण को अधिकार दिनी। अर यों न नऽ त दैंत की, अर ना ही वेकी मूरत की पूजा कैरी, अर ना ही अपणा माथा या हाथ पर वेकी मोर लगवै, वु सब ज्यून्दा ह्वे गैनी, अर ऊंन राजा बणि के मसीह का दगड़ा मा एक हजार साल तक राज कैरी। Viz kapitolaगढवली नयो नियम4 वेका बाद मिल कुछ सिंहासन दिखिनि अर जु लोग ऊं सिंहासनों पर बैठयां छा ऊं तैं राज्य कनु को अधिकार दिये गै छो। मिल ऊं लुखुं की आत्माओं तैं भि देखि, जूंका मुंड तैं काटेले छो किलैकि ऊंल यु अंगीकार कैरी छो कि यीशु ऊंको प्रभु छो, अर उ परमेश्वर का वचन पर विश्वास करदा छा। ऊं लुखुं ल जानवर या वेकी मूर्ति की आराधना नि कैरी छै, ऊंल अपड़ा माथा या हथों पर जानवर की छाप भि नि लगै छै। यु लोग दुबरा ज्यून्दा हवे गैनी अर एक हजार सालों तक मसीह का दगड़ी मिली के राज्य कैरी। Viz kapitola |