18 प्रमात्मैं रा क्रोध ता तियां मणु री सब अभक्ति अतै अधर्म रै कम जैड़ै मणु करदै हिन तियां पुर स्वर्गा थऊँ प्रकट भुन्दा, जैड़ै ऐस तरीकै मणु जो प्रमात्मैं रै सत्य जो जाणनै थऊँ रोकदै हिन।