48 क्ओकि प्रमात्मैं अपणी दासी री दीनता पुर कृपादृष्टि करी हा अतै अजा थऊँ बाद मिन्जो जुगा-जुगा रै मणु बलणा कि धन्य हा ऐह जनानी।