27 इन्दै पिता प्रमात्मैं रै नेड़ै शुद्ध अतै साफ भक्ति ऐह हा कि अनाथ अतै विधवा जनानी रै दुखा मन्ज तंयारा खयाल रखा अतै अपणै आपा जो संसार री बुराई थऊँ निष्कलंक रखा।