प्रकाश 18:13 - देउखरिया थारु13 और दालचिनी, मसाला, सुगन्धित धूप, मूर्र, उज्जर-धूप, दारु, तेल, चिक्तार पिठा, गोहूँ, गैया-भैसीन्याँ, भेँरी, घोरी और रथ आबसे मनै नै किन्थाँ। और जोन मनै समान किन्थाँ और बेँच्थाँ, ओइने आब मनैनहे गुलाम बनाइक लग बेँच्थाँ। Viz kapitolaदङ्गौरा थारू13 दालचिनी, सब मेह्रिक मसला, वास अइना धूप, मूर्र ओ उज्जर धूप, मद ओ त्याल, मैदा ओ गोहूँ, गोरु-बच्छु ओ छेग्री-भेँरी, घ्वार ओ रथ, कमारा-कमारी कुछु फे नैकिन्नेहुइट। Viz kapitola |