गलाती 5:20 - देउखरिया थारु20 और ओइने मूर्तिहे पुज्थाँ, मन्तुर पहरथाँ। और ओइने अपन संघरियनहे घृणा करथाँ। ओइने एकदोसर जहनसे झगरा खेल्थाँ। और ओइने उ सक्कु चिजके लालच करथाँ जोन चिज दोसुर जहनके थेन रथिन। ओइने महा झत्ति झोँक्काजिथाँ। और ओइने अपन काम बनाइक लग दोसुर मनैनके गोरा तन्थाँ। ओइने उ मनैनहे अस्वीकार करदेथाँ, जेनसे ओइने असहमत रथाँ। और ओइने ओइन्हे किल साथ देथाँ, जेनसे ओइने सहमत रथाँ। Viz kapitolaदङ्गौरा थारू20 मूर्तिपूजा कर्ना, मन्त्रतन्त्र कर्ना, दुश्मनी कर्ना, झैझग्रा कर्ना, ईर्ष्या कर्ना, रिस कर्ना, आपन केल भलाइ चितैना, फूट अन्ना, गुटबन्दी कर्ना, Viz kapitola |