२ कोरिन्थी 2:4 - देउखरिया थारु4 काकरेकी तुहुरिन्हे दु:खि करैना नै हो। पर तुहुरिन्के उप्पर रलक मोरिक प्रशस्त प्रेम तुहुरे जानो कहिके मनके बहुत्ते पीड़ा और वेदनामे बहुत्ते आँश बहैती मै यी चिट्ठी तुहुरिन्हे लिखल रहुँ। Viz kapitolaदङ्गौरा थारू4 टुन्हक चित्त दुःखाइक लाग नाहीँ, तर टुन्हकप्रति रहल म्वार गहिँर प्रेम टुह्र जानो कैक धेर दुःखकष्टम आँस बहैटी टुँहन उ चिठी लिख्नु। Viz kapitola |