सफ़नियाह 3:2 - किताब-ए मुक़द्दस2 न वह सुनता, न तरबियत क़बूल करता है। न वह रब पर भरोसा रखता, न अपने ख़ुदा के क़रीब आता है। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20192 उसने कलाम को न सुना, वह तरबियत पज़ीर न हुआ। उसने ख़ुदावन्द पर भरोसा न किया, और अपने ख़ुदा की क़ुरबत क़ी आरज़ू न की। Viz kapitola |