गज़लुल 8:1 - किताब-ए मुक़द्दस1 काश तू मेरा सगा भाई होता, तब अगर बाहर तुझसे मुलाक़ात होती तो मैं तुझे बोसा देती और कोई न होता जो यह देखकर मुझे हक़ीर जानता। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20191 काश कि तू मेरे भाई की तरह होता, जिसने मेरी माँ की छातियों से दूध पिया। मैं जब तुझे बाहर पाती, तो तेरी मच्छियाँ लेती, और कोई मुझे हक़ीर न जानता। Viz kapitola |