रुत 2:13 - किताब-ए मुक़द्दस13 रूत ने कहा, “मेरे आक़ा, अल्लाह करे कि मैं आइंदा भी आपकी मंज़ूरे-नज़र रहूँ। गो मैं आपकी नौकरानियों की हैसियत भी नहीं रखती तो भी आपने मुझसे शफ़क़त भरी बातें करके मुझे तसल्ली दी है।” Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201913 तब उसने कहा, “ऐ मेरे मालिक! तेरे करम की नज़र मुझ पर रहे, क्यूँकि तूने मुझे दिलासा दिया और मेहरबानी के साथ अपनी लौंडी से बातें कीं जब कि मैं तेरी लौंडियों में से एक के बराबर भी नहीं।” Viz kapitola |