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रोमियों 7:7 - किताब-ए मुक़द्दस

7 क्या इसका मतलब यह है कि शरीअत ख़ुद गुनाह है? हरगिज़ नहीं! बात तो यह है कि अगर शरीअत मुझ पर मेरे गुनाह ज़ाहिर न करती तो मुझे इनका कुछ पता न चलता। मसलन अगर शरीअत न बताती, “लालच न करना” तो मुझे दर-हक़ीक़त मालूम न होता कि लालच क्या है।

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

7 पस हम क्या करें क्या शरी'अत गुनाह है? हरगिज़ नहीं बल्कि बग़ैर शरी'अत के मैं गुनाह को न पहचानता मसलन अगर शरी'अत ये न कहती कि तू लालच न कर तो में लालच को न जानता।

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उर्दू हमअस्र तरजुमा

7 पस हम क्या कहें? क्या शरीअत गुनाह है? हरगिज़ नहीं, क्यूंके अगर शरीअत न होती तो मैं गुनाह को न पहचानता मसलन अगर शरीअत ये हुक्म न देती, “तुम लालच न करना, तो मैं लालच को न जानता।”

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रोमियों 7:7

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