रोमियों 6:15 - किताब-ए मुक़द्दस15 अब सवाल यह है, चूँकि हम शरीअत के तहत नहीं बल्कि फ़ज़ल के तहत हैं तो क्या इसका मतलब यह है कि हमें गुनाह करने के लिए खुला छोड़ दिया गया है? हरगिज़ नहीं! Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201915 पस क्या हुआ? क्या हम इसलिए गुनाह करें कि शरी'अत के मातहत नहीं बल्कि फ़ज़ल के मातहत हैं? हरगिज़ नहीं; Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा15 फिर क्या करें? क्या हम गुनाह करते रहें इसलिये के हम शरीअत के मातहत नहीं बल्के ख़ुदावन्द के फ़ज़ल के मातहत हैं? हरगिज़ नहीं! Viz kapitola |