रोमियों 4:2 - किताब-ए मुक़द्दस2 हम कह सकते हैं कि अगर वह शरीअत पर अमल करने से रास्तबाज़ ठहरता तो वह अपने आप पर फ़ख़र कर सकता था। लेकिन अल्लाह के नज़दीक उसके पास अपने आप पर फ़ख़र करने का कोई सबब न था। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20192 क्यूँकि अगर अब्रहाम आमाल से रास्तबाज़ ठहराया जाता तो उसको फ़ख़्र की जगह होती; लेकिन ख़ुदा के नज़दीक नहीं। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा2 अगर हज़रत इब्राहीम अपने आमाल की बिना पर रास्तबाज़ ठहराये जाते तो उन्हें फ़ख़्र करने का हक़ होता लेकिन ख़ुदा के हुज़ूर में नहीं। Viz kapitola |