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रोमियों 3:31 - किताब-ए मुक़द्दस

31 फिर क्या हम शरीअत को ईमान से मनसूख़ करते हैं? हरगिज़ नहीं, बल्कि हम शरीअत को क़ायम रखते हैं।

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

31 पस क्या हम शरी'अत को ईमान से बातिल करते हैं। हरगिज़ नहीं बल्कि शरी'अत को क़ाईम रखते हैं।

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उर्दू हमअस्र तरजुमा

31 क्या हम इस ईमान के ज़रीये से शरीअत को मन्सूख़ कर देते हैं? हरगिज़ नहीं! बल्के, इस से शरीअत को क़ाइम रखते हैं।

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रोमियों 3:31

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