रोमियों 2:14 - किताब-ए मुक़द्दस14 और गो ग़ैरयहूदियों के पास शरीअत नहीं होती लेकिन जब भी वह फ़ितरती तौर पर वह कुछ करते हैं जो शरीअत फ़रमाती है तो ज़ाहिर करते हैं कि गो हमारे पास शरीअत नहीं तो भी हम अपने आपके लिए ख़ुद शरीअत हैं। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201914 इसलिए कि जब वो क़ौमें जो शरी'अत नहीं रखती अपनी तबी'अत से शरी'अत के काम करती हैं तो बावजूद शरी'अत रखने के अपने लिए ख़ुद एक शरी'अत हैं। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा14 अलबत्ता जब वह ग़ैरयहूदी जो शरीअत नहीं रखते और तब्ई तौर पर शरीअत के मुताबिक़ काम करते हैं तो शरीअत न रखते हुए भी वह ख़ुद अपने लिये एक शरीअत हैं। Viz kapitola |