रोमियों 13:8 - किताब-ए मुक़द्दस8 किसी के भी क़र्ज़दार न रहें। सिर्फ़ एक क़र्ज़ है जो आप कभी नहीं उतार सकते, एक दूसरे से मुहब्बत रखने का क़र्ज़। यह करते रहें क्योंकि जो दूसरों से मुहब्बत रखता है उसने शरीअत के तमाम तक़ाज़े पूरे किए हैं। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20198 आपस की मुहब्बत के सिवा किसी चीज़ में किसी के क़र्ज़दार न हो क्यूँकि जो दूसरे से मुहब्बत रखता है उसने शरी'अत पर पूरा अमल किया। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा8 आपस की महब्बत के सिवा किसी चीज़ के कर्ज़दार न रहो क्यूंके जो दूसरों से महब्बत रखता है वह गोया शरीअत पर अमल करता है। Viz kapitola |